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  પડ્યો છું માર્ગની વચ્ચે મને પથ્થર ન માની લે. બ ની ઠોકર સુધારું છું મને ઈશ્વર ન માની લે. ભર્યા છે મેલ ભીતરમાં ઘણાયે, જન્મની સાથે   ઠઠારો બહારનો જોઈ મને સુંદર ન માની લે. - મન્સૂર કુરેશી
कोई समझाए ये क्या रंग है मैख़ाने का; आँख साकी की उठे नाम हो पैमाने का; गर्मी-ए-शमा का अफ़साना सुनाने वालों; रक्स देखा नहीं तुमने अभी परवाने का; चश्म-ए-साकी मुझे हर गम पे याद आती है; रास्ता भूल न जाऊँ कहीं मैख़ाने का; अब तो हर शाम गुज़रती है उसी कूचे में; ये नतीजा हुआ ना से तेरे समझाने का; मंज़िल-ए-ग़म से गुज़रना तो है आसाँ 'इक़बाल'; इश्क है नाम ख़ुद अपने से गुज़र जाने का। ~ Allama Iqbal 🌹

GooD MorninG

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नकली सिक्के.....

अब असली सिक़्क़े हैं ख़ुद पर शर्मिन्दा नकली सिक्कों ने वो जगह  बना ली है. दिनेश सोनी "मंज़र"
kaha aake rukane the raste, kaha mod tha use bhul jaa, woh jo mil gaya use yaad rakh, jo nahi mila use bhul jaa......

rahat indori

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इन्तेज़मात   नये  सिरे  से  सम्भाले   जायें | जितने कमज़र्फ़ हैं महफ़िल से  निकाले जायें | मेरा घर आग की  लपटों  में  छुपा  है लेकिन , जब   मज़ा  है  तेरे  आँगन  में  उजाले जायें | ग़म सलामत  है  तो  पीते  ही  रहेंगे  लेकिन , पहले  मैख़ाने   की   हालत   सम्भाले   जायें | ख़ाली  वक़्तों  में  कहीं  बैठ  के  रोलें   यारो , फ़ुर्सतें  हैं  तो   समन्दर   ही   खगांले   जायें | ख़ाक में यूँ न मिला  ज़ब्त  की  तौहीन  न  कर , ये  वो  आँसू  हैं  जो  दुनिया  को बहा ले जायें | हम भी प्यासे  हैं  ये  एहसास तो  हो  साक़ी  को , ख़ाली  शीशे  ही  हवाओं  में  उछाले  जायें | आओ...